अनहद नाद

August 29, 2006

राजकिशोर की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 1:42 pm

अच्छा

 

 

सुबह-सुबह की हवा सुहानी

और   शाम  की    धूप

आंखों को जो शीतल कर दे

सुंदर  है  वह   रूप

 

वर्षा अच्छी रिमझिम-रिमझिम

ज्यों  प्रिय  का   संदेश

देश वही अच्छा जो लगता

नहीं  कभी    परदेश ।

कुंवर नारायण की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 1:29 pm

 

दीवारें

 

 

अब मैं एक छोटे-से घर

और बहुत बड़ी दुनिया में रहता हूं

 

कभी मैं एक बहुत बड़े घर

और छोटी-सी दुनिया में रहता था

 

कम दीवारों से 

बड़ा फ़र्क पड़ता है

 

दीवारें न हों

तो दुनिया से भी बड़ा हो जाता है घर ।

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