सुनील गंगोपाध्याय की एक कविता(साभार:वागर्थ,नवम्बर 2006)

सिर्फ कविता के लिए
मूल बांग्ला कविता : सुनील गंगोपाध्याय
हिन्दी अनुवाद : प्रियंकर पालीवाल
सिर्फ कविता के लिए यह जन्म, सिर्फ कविता के लिए
कुछ खेल, सिर्फ कविता के लिए बर्फ़ीली सांझ बेला में
अकेले आकाश-पाताल पार कर आना, सिर्फ कविता के लिए
अपलक लावण्य की शान्ति एक झलक,
सिर्फ कविता के लिए नारी, सिर्फ
कविता के लिए इतना रक्तपात, मेघ में गंगा का निर्झर
सिर्फ कविता के लिए और बहुत दिन जीने की लालसा होती है
मनुष्य का इतना क्षोभमय जीवन, सिर्फ
कविता के लिए मैंने अमरत्व को तुच्छ माना है ।
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सुनील जी की इस बांग्ला कविता का हिन्दी अनुवाद हम सब के साथ बांटने का शुक्रिया !
Comment by मनीष — November 17, 2006 @ 3:41 pm
अनुवाद करना एक बहुत ही मुश्किल काम होता है. मूल कविता या लेख के “भाव” हूबहू दूसरी भाषा में लिख देना एक चुनौती भरा काम है. मैं बांग्ला भाषा तो नहीं जानता और ना ही मैनें सुनील गंगोपाध्याय जी की कवितायें पढी हैं, लेकिन यह अनुवाद पढ कर इतना अवश्य कहना चाहूंगा कि यदि सुनील गंगोपाध्याय जी यह रचना हिन्दी में करते तो शायद वह भी इन्हीं शब्दों का प्रयोग करते.
साधुवाद.
Comment by अनुराग — November 18, 2006 @ 9:33 am
साधुवाद, अद्भुत अनुवाद ।
कविता के लिए मैंने अमरत्व को तुच्छ माना है ।–पंक्ति लाजबाब है ।
Comment by Prabhakar Pandey — November 18, 2006 @ 10:18 am
मनीष, अनुराग और प्रभाकर भाई ,
उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद .
Comment by प्रियंकर — December 1, 2006 @ 12:54 pm