अनहद नाद

January 9, 2007

कुंवर नारायण की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 7:56 am

 

जिस समय में

 

जिस समय में

सब कुछ

इतनी तेजी से बदल रहा है

 

वही समय

मेरी प्रतीक्षा में

न जाने कब से

ठहरा हुआ है !

 

उसकी इस विनम्रता से

काल के प्रति मेरा सम्मान-भाव

कुछ अधिक

गहरा हुआ है ।

 

******

(समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार)

Blog at WordPress.com.