अनहद नाद

February 13, 2007

नीलेश रघुवंशी की कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 10:52 am

जंगल और जड़

 

इमारत के ऊपर इमारत

खाई के नीचे खाई

दूर-दूर तक फैला कंक्रीट का जंगल

 

आएगा एक दिन ऐसा आएगा

जब हमें हमारी जमीन मिलेगी वापस

सीमेंट की टंकी में पानी पीती चिड़िया से

कहा पीपल की फूटती जड़ ने।

 

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(समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार)

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