इस पृष्ठ पर : प्रयाग शुक्ल की एक कविता
इस पृष्ठ पर
इस पृष्ठ पर कोई धमाका नहीं है
तेज-तेज ध्वनियों का
इस पृष्ठ पर कोई धमाका नहीं है
बम्पर लॉटरी का
इस पृष्ठ पर नहीं है
कोई धमाकेदार विज्ञापन
इस पृष्ठ पर धमाके के साथ
नहीं फूट रहे हैं बम
इस पृष्ठ पर कोई
धमाका नहीं करने जा रहे
हैं हम
इस पृष्ठ को हम रखने
जा रहे हैं सादा
देखें इसमें क्या
अंकित करते हैं आप !
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( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )
इस रचना पर कोई टिप्पणी

नहीं करने जा रहे हैं हम…
देखें बिन कहे क्या..
समझते हैं आप…
Comment by manya — March 20, 2007 @ 9:56 am
acchi hai kavita lekin
aasan nahi samajhna,
lekhak ki suktiyon mein
hai kyon bhala ulajhna?
Comment by Arvind — March 20, 2007 @ 2:09 pm
इस पृष्ठ को हम रखने
जा रहे हैं सादा
फिर क्यूँ तोड़ दिया
यह वादा….
इतने बढ़िया शब्द सजा कर
सुंदर कविता दी छाप
फिर पूछते हो कि
देखें इसमें क्या अंकित करते हैं आप
—बहुत खूब! बधाई
Comment by समीर लाल — March 20, 2007 @ 3:47 pm
सोचा छोड दूं,
पर मन-परिवर्तित करता हुं,
लिख कर दो पंक्तिया,
उपस्थिति अंकित करता हुं।।
आशा है, आपका पन्ना
कोरा शेष रहेगा,
कुछ लिखा दिखा तो मेरा,
ना दोष विशेष रहेगा।
Comment by विशाल सिंह — March 22, 2007 @ 11:34 am
अच्छा है! इसे सादा ही रहने दो!
Comment by अनूप शुक्ला — March 24, 2007 @ 2:55 am
कहने को क्या बाकी रहता,
जब मौन ही सब कुछ कह देता!
Comment by Rachana — March 29, 2007 @ 5:13 pm