अनहद नाद

April 11, 2007

औरत

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 8:36 am

कैलाश सेंगर की तीन कविताएं

 

 

औरत

 

१.

बच्चे को सुलाती औरत

उसे सुनाती कहानी –

‘एक शहजादी को शहजादे से चुराकर

एक दैत्य ने पिंजड़े में बंद कर दिया’

कहानी सुन कर

बच्चा सो जाता है

कहानी की शहजादी

उसकी मां ही है

नहीं समझ पाता है।

 

२.

 

दोपहर को जब पति ऑफ़िस में

और बच्चे स्कूल में होते हैं

औरत टीवी पर आ रही

पुरानी ब्लैक एंड वाइट फ़िल्में देखती है

नई फ़िल्मों से

पुरानी फ़िल्में कितनी अच्छी होतीं हैं

कितना रोना आता है न उन्हें देखकर!

और तब खूब रोती है औरत

औरत सुकून से रोते हुए याद करती है

उन फ़िल्मों को

ताज़ा-ताज़ा,चुपके-चुपके देखने के वे प्रसंग

और खूब रो लेने के बाद,आंखें पोंछते हुए

हर रोज़ तय करती है वह

कि शाम पति और बच्चों के साथ

नई रंगीन फ़िल्मों के प्रोमोज़ देखेगी वह।

 

३.

 

औरत को

पुरानी आलमारी साफ़ करते हुए मिल जाती हैं

पुरानी तारीखों वाली     छुपाकर रखीं

कुछ गुलाबी चिट्ठियां     कुछ मुरझाए फूल

और चंद सूखी कसमें

पिछले माह ब्याह दी गई बेटी की

और उन्हें उसी तरह फिर से छुपाकर

लिखने लगती है बेटी को पत्र

पत्र में वह समझा देती है बेटी को

अच्छी तरह     संपूर्ण विधि

करवा चौथ की।

 

***********

 

( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )

9 Comments »

  1. कविताएँ वेदना देने वाली हैं।

    Comment by अतुल शर्मा — April 11, 2007 @ 10:02 am

  2. शायद मैं कहना चाहता हूँ कि कविताएँ पढ़ कर मुझे वेदना हुई है।

    Comment by अतुल शर्मा — April 11, 2007 @ 10:03 am

  3. बहुत दर्द है पंक्तियों में.

    Comment by समीर लाल — April 11, 2007 @ 4:49 pm

  4. मन को छू लेने वाली कविताएं ।

    Comment by अनूप भार्गव — April 12, 2007 @ 12:36 am

  5. बहुत सुंदर कविताएं हैं। दिल को छू गईं।

    Comment by महावीर — April 12, 2007 @ 11:29 pm

  6. ओह, यह औरत तो शायद हमारे आस-पास रहती है.
    कविता की विशेष समझ नहीं है मुझे, पर यह समझने को तो सामान्य सम्वेदना चाहिये.

    Comment by ज्ञानदत्त पाण्डेय — April 13, 2007 @ 6:39 am

  7. आँखें नम हो गयीं

    Comment by नरेश — April 13, 2007 @ 10:49 am

  8. दिल को छू लेने वाली कवितायें!

    Comment by अनूप शुक्ला — April 14, 2007 @ 11:57 am

  9. Aur kab tak aurat ko chchupa chchupa kar rulane ka irada hai? Are uske ansoo bhi dekhaiye aur uska dard bhi samjhiye aur purush ko atma ke bhitar jhakne bhi sikhaiye!

    Comment by nisha — April 17, 2007 @ 11:25 am

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