एक बांग्ला कविता
रंजीत कुमार राय की बांग्ला कविता
( बांग्ला से अनुवाद : प्रियंकर )
जीवन आशा
नीले आकाश के अकाउण्ट में
अब और जमा नहीं हो रही है
स्वच्छ हवा ।
अकुलाहट से भरा मानव
खोज रहा है जीवन की समग्रता
लॉकर के गुमसुम अंधेरे में ।
इस कुहासे के छंटते ही
पुनः –
प्रकाश की पिपासा !
जीवन की आशा !
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