अनहद नाद

May 12, 2007

समय की कमी थी बहुत

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अल्पना मिश्र की एक कविता

 

मैं

 

समय की कमी थी बहुत

मेरे समूचे वजन से भारी थीं

काम की गठरियां

गांठों में बंधा था

टुकड़ा-टुकड़ा मेरा आप

 

शोक मोह चिंता और हर्ष से बना

बेखबर ईश्वर बैठा था स्कूटी पर

मेरे पीछे

 

मैं जाने किस शोक में डूबी

किस मोह में हिम्मत धरती

किस चिंता में कांपती

किस हर्ष के लिए विकल

हाथों में मन भर अनाज लादे

 

भीड़ के बीच

स्कूटी चला रही थी ।

 

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( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )

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