हमने उनके घर देखे

भगवत रावत की एक कविता
हमने उनके घर देखे
हमने उनके घर देखे
घर के भीतर घर देखे
घर के भी तलघर देखे
हमने उनके
डर देखे ।
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भगवत रावत की एक कविता
हमने उनके घर देखे
हमने उनके घर देखे
घर के भीतर घर देखे
घर के भी तलघर देखे
हमने उनके
डर देखे ।
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