नदियों को जोड़ने के पहले
रंजीत कुमार राय की बांग्ला कविता
अनुवाद : प्रियंकर
बिखरती पहचान
नदियों को जोड़ने के पहले
जुड़ना होगा नदी से
नदी पत्थरों को भेद कर आती है
आकार देती है पत्थरों
अब नदी के रास्ते में हैं कंक्रीट के पत्थर
गति के संधान में पहुंच गए मंगल तक
नदी की गति में पैदा किए अवरोध
महाकाश को जानने की उत्कट अभिलाषा
दूर और दूर पहुंचे पड़ोसी से
पानी पत्थर महाकाश – लगता है जैसे
जान लिया सब कुछ … पृथ्वी का समूचा रहस्य
अपनी पहचान को ऊंचाई देने में
रौंद डाले औरों को पहचानने के सारे मार्ग ।
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(बांग्ला लघु पत्रिका हवा४९ के पोस्ट-मॉडर्न बांग्ला पोएट्री पर केन्द्रित अंक ‘अधुनांतिक बांग्ला कविता’ से साभार )