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	<title>Comments on: आना फ़ुरसतिया का &#8230;.</title>
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	<description>प्रियंकर का काव्य और काव्य-चर्चा पर केन्द्रित चिट्ठा</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 05:34:31 +0000</pubDate>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; टिप्पणी न कर पाने के कुछ मासूम बहाने</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-1091</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; टिप्पणी न कर पाने के कुछ मासूम बहाने</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Oct 2007 03:52:42 +0000</pubDate>
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		<description>[...] ब्लागर की पोस्ट् पर् या उसकी टिप्पणी पर उससे इत्तफ़ाक न रखते हुये कोई बचकानी [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] ब्लागर की पोस्ट् पर् या उसकी टिप्पणी पर उससे इत्तफ़ाक न रखते हुये कोई बचकानी [...]</p>
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		<title>By: प्रियंकर</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-822</link>
		<dc:creator>प्रियंकर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jul 2007 11:57:49 +0000</pubDate>
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		<description>मिसिर जी महाराज से मुलाकात हो गई है . धीरज धरिए , विवरण ज़रूर दिया जाएगा .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मिसिर जी महाराज से मुलाकात हो गई है . धीरज धरिए , विवरण ज़रूर दिया जाएगा .</p>
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		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-810</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jul 2007 12:55:37 +0000</pubDate>
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		<description>मिसिरजी की मुलाकाता प्रियंकरजी से हो चुकी होगी। विवरण् प्र्स्तुत् किये जायें। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मिसिरजी की मुलाकाता प्रियंकरजी से हो चुकी होगी। विवरण् प्र्स्तुत् किये जायें। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shiv Kumar Mishra</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-800</link>
		<dc:creator>Shiv Kumar Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 13:17:01 +0000</pubDate>
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		<description>Priyankar ji,

Anoop jee ki Kolkata yatra ke baare mein parhkar bahut khush hua....
Main late-lateef aadmi hoon.So aapkee post bhee aaj hi dekha.Post dekh kar hi ichchha hui ki aaj hee kisi tarah mil paata to kitna achchha hota. Ab to aapse milkar hi baatein hongi.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Priyankar ji,</p>
<p>Anoop jee ki Kolkata yatra ke baare mein parhkar bahut khush hua&#8230;.<br />
Main late-lateef aadmi hoon.So aapkee post bhee aaj hi dekha.Post dekh kar hi ichchha hui ki aaj hee kisi tarah mil paata to kitna achchha hota. Ab to aapse milkar hi baatein hongi.</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; इंक-ब्लागिंग के कुछ फुटकर फ़ायदे</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-791</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; इंक-ब्लागिंग के कुछ फुटकर फ़ायदे</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 16:12:18 +0000</pubDate>
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		<description>[...] आपको आये दिन कोई न कोई टोंकता रहेगा- फायर-फ़ाक्स में नहीं दिख रहा, ओपेरा में नहीं खुलता, लेफ़्ट एलाइन करो, [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] आपको आये दिन कोई न कोई टोंकता रहेगा- फायर-फ़ाक्स में नहीं दिख रहा, ओपेरा में नहीं खुलता, लेफ़्ट एलाइन करो, [...]</p>
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		<title>By: तिल का ताड़, झूलता झोपड़ा और सुनहला पहाड़ &#171; अनहद नाद</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-755</link>
		<dc:creator>तिल का ताड़, झूलता झोपड़ा और सुनहला पहाड़ &#171; अनहद नाद</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 08:42:04 +0000</pubDate>
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		<description>[...] . हम रूमानी हुए .  रूमान की तरंग में कुछ लिख मारा . पढ़कर कुछ मित्र हमसे भी ज्यादा [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] . हम रूमानी हुए .  रूमान की तरंग में कुछ लिख मारा . पढ़कर कुछ मित्र हमसे भी ज्यादा [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: प्रमोद सिंह</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-754</link>
		<dc:creator>प्रमोद सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 06:23:34 +0000</pubDate>
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		<description>सुकुल जी और तिवारी जी, आप गुणी-ज्ञानीजनों से विनम्र निवेदन है कि अपना यह अंतरंग संवाद पड़ोस के किसी साईबर कैफ़े में जाकर फरियायें.. प्रियंकर की ऑलरेडी कुछ ज्‍यादा ही पक चुकी दाल को और खराब न करें.. हद है..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुकुल जी और तिवारी जी, आप गुणी-ज्ञानीजनों से विनम्र निवेदन है कि अपना यह अंतरंग संवाद पड़ोस के किसी साईबर कैफ़े में जाकर फरियायें.. प्रियंकर की ऑलरेडी कुछ ज्‍यादा ही पक चुकी दाल को और खराब न करें.. हद है..</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-753</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 02:43:08 +0000</pubDate>
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		<description>..कानपुर मेरा भी घर है..आना होगा ही.. हो सकता है कोई रिश्तेदारी निकल आए.. फिर तो ये मतभेद और भ्रम टूट कर समाप्त हो ही जायेंगे..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>..कानपुर मेरा भी घर है..आना होगा ही.. हो सकता है कोई रिश्तेदारी निकल आए.. फिर तो ये मतभेद और भ्रम टूट कर समाप्त हो ही जायेंगे..</p>
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	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-752</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 01:51:44 +0000</pubDate>
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		<description>अभयजी, इस मसले पर इतना कुछ कहा-सुना जा चुका कि अब और कुछ नहीं कहना ही श्रेयस्कर समझता हूंै। आपने मेरे बारे में जो धारणायें बनायी निश्चित तौर पर उनका आधार रहा होगा। मैं एक-एक वाक्य बीन-बटोरकर आपके सामने पेश करके अपने को पाक-साफ़ साबित करने की इच्छा नहीं बना पाया। मैंने पहले भी लिखा कि मुझे अपने बारे में कोई गलतफ़हमी नहीं है अपने बारे में। अभी भी नहीं। मैंने अपने बारे में कोई छवि नहीं बनाई। फिर भी अगर अपरोक्ष रूप में मेरी बनी किसी  इमेज के अनुरूप आपको मुझ्से जो अपेक्षायें हो गयीं जिनको मैं पूरा नहीं कर सका तो उसके लिये मैं अफ़सोस जाहिर करता हूं। लेकिन यह एक मायने में अच्छा ही हुआ कि आपको मेरी असली सूरत दिख गयी। भ्रम जितनी जल्दी हो टूट जाने चाहिये। इसके लिये आपको बधाई भी कि आप मेरे बारे में सच्चाई जान गये। बिना मिले, इतनी जल्दी। :) प्रियंकर जी से फिर अफ़सोस कि आपके ब्लाग का यह सवाल-जवाब में इस्तेमाल हो रहा है। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभयजी, इस मसले पर इतना कुछ कहा-सुना जा चुका कि अब और कुछ नहीं कहना ही श्रेयस्कर समझता हूंै। आपने मेरे बारे में जो धारणायें बनायी निश्चित तौर पर उनका आधार रहा होगा। मैं एक-एक वाक्य बीन-बटोरकर आपके सामने पेश करके अपने को पाक-साफ़ साबित करने की इच्छा नहीं बना पाया। मैंने पहले भी लिखा कि मुझे अपने बारे में कोई गलतफ़हमी नहीं है अपने बारे में। अभी भी नहीं। मैंने अपने बारे में कोई छवि नहीं बनाई। फिर भी अगर अपरोक्ष रूप में मेरी बनी किसी  इमेज के अनुरूप आपको मुझ्से जो अपेक्षायें हो गयीं जिनको मैं पूरा नहीं कर सका तो उसके लिये मैं अफ़सोस जाहिर करता हूं। लेकिन यह एक मायने में अच्छा ही हुआ कि आपको मेरी असली सूरत दिख गयी। भ्रम जितनी जल्दी हो टूट जाने चाहिये। इसके लिये आपको बधाई भी कि आप मेरे बारे में सच्चाई जान गये। बिना मिले, इतनी जल्दी। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> प्रियंकर जी से फिर अफ़सोस कि आपके ब्लाग का यह सवाल-जवाब में इस्तेमाल हो रहा है। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://anahadnaad.wordpress.com/2007/07/09/furasitiyas-visit/#comment-751</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Jul 2007 20:46:56 +0000</pubDate>
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		<description>पिछले कमेंट में मैंने प्रियंकर जी से  माफ़ी वाली बात लिख कर मिटा दी थी.. मेरी आप के प्रति शिकायत कमज़ोर लगने लग पड़ी थी.. प्रियंकर जी से उम्मीद है कि वे मुझे माफ़ करेंगे.. मैं आया उनके लिखे पर प्रतिक्रिया करने था पर अनूप जी ने मुझे अरझा लिया.. उनके झोले में एक प्रतिक्रिया की आई कमी के लिए भी मैं उन्ही को जिम्मेदार ठहराता हूँ..  

अनूप जी.. आप इस बारे में कुछ ना कहना चाहें.. मुझे एक दो बाते और कहनी हैं.. एक मनुष्य के रूप में.. एक लेखक के रूप में.. एक ब्लॉगर के रूप में आप आदरणीय हैं सम्माननीय हैं.. मगर कोई भी हर पक्ष अनुकरणीय नहीं होता.. आप भी नहीं हैं.. इस लिए इस मामले में आप की भूमिका की आलोचना की.. और दूसरे साथियों की भी..( 
 
'शाह आलम कैम्प की रूहें' पर बेंगाणी बंधुऒ के कमेंट को आप क्या कहेंगे.. श्रीश शर्मा तक्नीक के अच्छे ज्ञानी हैं.. मैं उनके ज्ञान का सम्मान करता हूँ.. मगर इन मामलों पर उनके कमेंट भी ऐसे होते हैं कि मेरा आकलन ऐसा बना.. आप के बारे में ई-स्वामी के चिठ्ठे में लिखा है(आप से एक इंटरव्यू के दौरान) कि आप विवाद के मामलों में अलग थलग पड़ गए साथी का पक्ष लेते हैं.. क्या इस मामले में आप ऐसा कर पाये.. ? क्यों? नासिर जैसे साथी को जिस तरह से जवाब दिया गया साम्प्रदायिकता जैसे मसले पर .. और आप जो अलग थलग लोगों के साथ खड़े होने की छवि रखते हैं.. क्या किया आपने..? मौन साधा.. किसको बचाने के लिए..? जीतू और संजय को..? एक सत्ता पक्ष या प्रशासन, जो कहें.. और दूसरा गुजरात के हत्यारों को वैचारिक रूप से सही ठहराता.. आज तक आप ने नासिर से नहीं कहा कि उसके साथ ऐसा नहीं किया जाना चाहिये था.. क्यों? क्यों आप को संजय बेंगाणी का पक्ष ज़्यादा समझ आता है.. और नासिर का बिलकुल नहीं.. 

इस आभासी दुनिया के अमिताभ बच्चन से क्या इतनी उम्मीद की जा सकती है कि वो बीस बीस को ना मारे.. पर कम से कम एक अलग थलग पड़ जाने वाले साथी को बचा ले.. जैसा करने की उस ने छवि भी बना रखी है.. पर क्या आप ऐसा कर सके.. ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले कमेंट में मैंने प्रियंकर जी से  माफ़ी वाली बात लिख कर मिटा दी थी.. मेरी आप के प्रति शिकायत कमज़ोर लगने लग पड़ी थी.. प्रियंकर जी से उम्मीद है कि वे मुझे माफ़ करेंगे.. मैं आया उनके लिखे पर प्रतिक्रिया करने था पर अनूप जी ने मुझे अरझा लिया.. उनके झोले में एक प्रतिक्रिया की आई कमी के लिए भी मैं उन्ही को जिम्मेदार ठहराता हूँ..  </p>
<p>अनूप जी.. आप इस बारे में कुछ ना कहना चाहें.. मुझे एक दो बाते और कहनी हैं.. एक मनुष्य के रूप में.. एक लेखक के रूप में.. एक ब्लॉगर के रूप में आप आदरणीय हैं सम्माननीय हैं.. मगर कोई भी हर पक्ष अनुकरणीय नहीं होता.. आप भी नहीं हैं.. इस लिए इस मामले में आप की भूमिका की आलोचना की.. और दूसरे साथियों की भी..( </p>
<p>&#8216;शाह आलम कैम्प की रूहें&#8217; पर बेंगाणी बंधुऒ के कमेंट को आप क्या कहेंगे.. श्रीश शर्मा तक्नीक के अच्छे ज्ञानी हैं.. मैं उनके ज्ञान का सम्मान करता हूँ.. मगर इन मामलों पर उनके कमेंट भी ऐसे होते हैं कि मेरा आकलन ऐसा बना.. आप के बारे में ई-स्वामी के चिठ्ठे में लिखा है(आप से एक इंटरव्यू के दौरान) कि आप विवाद के मामलों में अलग थलग पड़ गए साथी का पक्ष लेते हैं.. क्या इस मामले में आप ऐसा कर पाये.. ? क्यों? नासिर जैसे साथी को जिस तरह से जवाब दिया गया साम्प्रदायिकता जैसे मसले पर .. और आप जो अलग थलग लोगों के साथ खड़े होने की छवि रखते हैं.. क्या किया आपने..? मौन साधा.. किसको बचाने के लिए..? जीतू और संजय को..? एक सत्ता पक्ष या प्रशासन, जो कहें.. और दूसरा गुजरात के हत्यारों को वैचारिक रूप से सही ठहराता.. आज तक आप ने नासिर से नहीं कहा कि उसके साथ ऐसा नहीं किया जाना चाहिये था.. क्यों? क्यों आप को संजय बेंगाणी का पक्ष ज़्यादा समझ आता है.. और नासिर का बिलकुल नहीं.. </p>
<p>इस आभासी दुनिया के अमिताभ बच्चन से क्या इतनी उम्मीद की जा सकती है कि वो बीस बीस को ना मारे.. पर कम से कम एक अलग थलग पड़ जाने वाले साथी को बचा ले.. जैसा करने की उस ने छवि भी बना रखी है.. पर क्या आप ऐसा कर सके.. ?</p>
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