अनहद नाद

July 19, 2007

नदी के आगे सिजदा

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 6:57 am

ज्योतिर्मय दास की एक बांग्ला कविता

 

नदी के आगे सिजदा

 

नदी से हमें कुछ सीख लेनी थी

देखा जाय तो यह अटूट प्रवहमयता ही जीवन है

दोनों किनारे नए अन्न की धारावाहिकता

जीवन को आगे बढने की –  प्रवाहित होने की मंत्रणा देती है

एक महान जीवन के प्रवाहित होने से

जमा हुआ अंधकार समाप्त होगा

बह जाएंगे अज्ञान के घास-फूस …

नदी का अर्थ है नवीनता और धारावाहिकता

और नवीनता का दूसरा नाम है जीवन

इसलिए फ़ुरसत हो तो

नदी के आगे सिजदा करना बेहतर है !

 

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( बांग्ला लघु पत्रिका हवा ४९ के पोस्ट-मॉडर्न बांग्ला पोएट्री पर  केन्द्रित अंक ‘अधुनान्तिक बांग्ला कविता’ से साभार )

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