Posted by: PRIYANKAR | August 2, 2007

कुंवर नारायण की एक कविता

उदासी के रंग

 

उदासी भी

एक पक्का रंग है जीवन का

 

उदासी के भी तमाम रंग होते हैं

जैसे

फ़क्कड़ जोगिया

पतझरी भूरा

फीका मटमैला

आसमानी नीला

वीरान हरा

बर्फ़ीला सफ़ेद

बुझता लाल

बीमार पीला

 

कभी-कभी धोखा होता

उल्लास के इंद्रधनुषी रंगों से खेलते वक्त

कि कहीं वे

किन्हीं उदासियों से ही

छीने हुए रंग तो नहीं हैं ?

 

******

 

( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )

 


Responses

  1. बहुत ही अच्छी है.

  2. अद्भुत कविता है । फिर से अनुरोध करूंगा, एकांत श्रीवास्‍तव की रंगों पर लिखी कविताएं अगर मिल जाएं तो मज़ा आ जायेगा ।

  3. बेहद सुंदर.. उदासी के भी अपने रंग होते हैं.. जीवन अधूरा है इन रंगों के बिना..

  4. कितने रंगों की उदासी
    उसमें भी पसंदीदा एक रंग
    जब तक मैला ना हो
    वही पहन लड़ते हैं जिंदगी की जंग

  5. आप को पढ़ना ही पड़ता है। चुन-चुन के छाप दो रहे हैं। अच्छा कर रहे हैं।
    कभी-कभी कवि का थोड़ा-बहुत परिचय भी दें।

  6. अहहा, क्या रंग बताये है उदासी के, बहुत खूब. आभार कविता पढ़वाने का.

  7. कुछ न कहो


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