पेड़
योगेश अटल की एक कविता
पेड़
हवा चली
चलती रही
मुझे गिराने को
पानी बरसा
बरसता रहा
मुझे मिटाने को
पर मैंने की शिकायत
न हवा से
न पानी से
मैंने अपनी जड़ों की पकड़
को मजबूत किया है
उनसे जो कुछ लेना था
चुपचाप लिया है
और भरा-पूरा जीवन जिया है ।
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कवि परिचय : प्रो० योगेश अटल अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के समाजशास्त्री और मानवविज्ञानी हैं तथा यूनेस्को के रीज़नल ऐडवाइज़र रहे हैं . हमारी पत्रिका ‘समकालीन सृजन’ से उनका एक लेखक के रूप में जुड़ाव रहा है . कल उनसे मिलना हुआ . वे ऐन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में व्याख्यान देने कोलकाता आए हुए हैं .