अनहद नाद

August 7, 2007

पेड़

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 योगेश अटल की एक कविता

 

पेड़ 

 

हवा चली

चलती रही

मुझे गिराने को

पानी बरसा

बरसता रहा

मुझे मिटाने को

 

पर मैंने की शिकायत

न हवा से

न पानी से

 

मैंने अपनी जड़ों की पकड़

को मजबूत किया है

उनसे जो कुछ लेना था

चुपचाप लिया है

और भरा-पूरा जीवन जिया है ।

 

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कवि परिचय : प्रो० योगेश अटल अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के  समाजशास्त्री और  मानवविज्ञानी हैं तथा यूनेस्को के रीज़नल ऐडवाइज़र रहे हैं . हमारी पत्रिका ‘समकालीन सृजन’ से उनका एक लेखक के रूप में जुड़ाव रहा है . कल उनसे मिलना हुआ . वे ऐन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में व्याख्यान देने कोलकाता आए हुए हैं .

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