अनहद नाद

August 9, 2007

अधबने मकानों में खेलते बच्चे

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 5:54 am

 

रति सक्सेना की एक कविता

 

अधबने मकानों में खेलते बच्चे

 

अधबने मकानों के बीच

खेलते बच्चे

अनजाने में खोज रहे हैं

अपने-अपने घर

 

अधलगी खिड़की की चौखट से

झांक रहे हैं दुनिया के बाहर

बिना बनी छत पर

टांग रहे हैं अपना-अपना आसमान

 

मकानों की खोल में घुसने से पहले

घर की नींव को

भरने की कोशिश कर रहे हैं

खिलखिलाहटों से ।

 

*******

 

( समकालीन सृजन   के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )

 

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