अनहद नाद

August 27, 2007

लीलाधर जगूड़ी की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 10:36 am

 

Leeladhar Jagoori

प्रार्थना

 

फलो !

जब महंगे बेचे जाओ

तो तुरंत सड़ जाया करो

छूते ही या देखते ही ।

 

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( काव्य संकलन ‘घबराये हुए शब्द’ से साभार )

 

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