प्रार्थना
फलो !
जब महंगे बेचे जाओ
तो तुरंत सड़ जाया करो
छूते ही या देखते ही ।
********
( काव्य संकलन ‘घबराये हुए शब्द’ से साभार )
प्रार्थना
फलो !
जब महंगे बेचे जाओ
तो तुरंत सड़ जाया करो
छूते ही या देखते ही ।
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( काव्य संकलन ‘घबराये हुए शब्द’ से साभार )
Posted in कविताएं/Poems | Tags: लीलाधर जगूड़ी
आह्ह!!! यह कौन सा पहलू छू लिया. वाह.
By: समीर लाल on August 28, 2007
at 1:37 am
एक मेरी भी छापें:
हमने अमावस को चाँद देखा है……..
वो खड़ी थीं।
–समीर लाल ‘समीर’
By: समीर लाल on August 28, 2007
at 1:38 am