अनहद नाद

August 28, 2007

सेब बेचना

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 4:55 am

 

रघुवीर सहाय की एक कविता

 

सेब बेचना

 

मैंने कहा डपटकर

ये सेब दागी हैं

नहीं नहीं साहब जी

उसने कहा होता

आप निश्चिंत रहें

तभी उसे खांसी का दौरा पड़ गया

उसका सीना थामे खांसी यही कहने लगी ।

 

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( कवि की फोटो अनुभूति-हिंदी.ऑर्ग   से साभार )

 

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