Posted by: PRIYANKAR | August 29, 2007

तो

Leeladhar Jagoori

लीलाधर जगूड़ी की एक कविता

 

तो

 

जब उसने कहा

कि अब सोना नहीं मिलेगा

तो मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ा

पर अगर वह कहता

कि अब नमक नहीं मिलेगा

तो शायद मैं रो पड़ता ।

 

*********

 

( काव्य संकलन ‘घबराये हुए शब्द’ से साभार )

 


Responses

  1. बहुत बढिया रचना है।अच्छी रचना प्रेषित की है।

  2. मिलने न मिलने में
    जोड़ दें पैसे:

    अगर वो कहे
    कि हवा के पैसे लगेंगे
    तो सुन कर शायद मैं मर ही जाता.
    (प्रियंकर जी, इसे विशुद्ध कमेण्ट मानें – लीलाधर जी से टक्कर लेती कविता करने की बेहूदा कोशिश नहीं!)

  3. अगर वाह से भी अच्‍छा और असरदार शब्‍द हो तो
    इस कविता के लिए मेरी ओर से वही शब्‍द कहा मान लें

  4. सही है.. पानी के तो ये हाल होने वाले हैं..

  5. बहुत बढ़िया !
    घुघूती बासूती


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