अनहद नाद

September 4, 2007

अपमान

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 7:44 am

Bhavani bhai 

भवानी भाई की एक कविता

 

अपमान

 

अपमान का

इतना असर

मत होने दो अपने ऊपर

 

सदा ही

और सबके आगे

कौन सम्मानित रहा है भू पर

 

मन से ज्यादा

तुम्हें कोई और नहीं जानता

उसी से पूछकर जानते रहो

 

उचित-अनुचित

क्या-कुछ

हो जाता है तुमसे

 

हाथ का काम छोड़कर

बैठ मत जाओ

ऐसे गुम-सुम से !

 

**********

 

Blog at WordPress.com.