अनहद नाद

September 5, 2007

रघुवीर सहाय की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 5:42 am

  

दर्द

 

देखो शाम घर जाते बाप के कंधे पर

बच्चे की ऊब देखो

उसको तुम्हारी अंग्रेज़ी कह नहीं सकती

और मेरी हिंदी भी कह नहीं पाएगी

अगले साल ।

 

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