अनहद नाद

September 10, 2007

प्रश्न

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लीलाधर जगूड़ी 

लीलाधर जगूड़ी की एक कविता

 

प्रश्न

 

धर्म में भगवान होते हैं

या भगवानों के भी अपने कुछ धर्म ?

 

क्यों मरना पड़ता है

क्यों जन्म लेना पड़ता है भगवान को भी ?

क्या जड़ ही दीर्घायु होते हैं

 

अपने को और अधिक गुलाम बनाने के लिए

भगवान ही हमारा सर्वोच्च मालिक क्यों हो ?

जबकि जन्म हमने लिया,मरना हमें है

 

क्या हमारी समस्याएं ही उसके होने का आधार हैं ?

या मनुष्यों की तरह भगवान को भी वैविध्य पसंद है ?

अगर ऐसा है तो भगवान !

तेरा मनुष्य होना बहुत पसंद आया मुझे ।

 

*****

 

( काव्य संकलन ‘ईश्वर की अध्यक्षता में’ से साभार )

 

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