अनहद नाद

September 22, 2007

शर्म

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 9:17 am

शैलेन्द्र की एक छोटी कविता

 

शर्म

 

चेहरे पर उनके

न शिकन

न शर्म है

ज़ेब गर्म है

 

*****

3 Comments »

  1. वाह!
    कविता छोटी है
    पर समेटे बहुत मर्म है!

    Comment by ज्ञानदत्त पाण्डेय — September 22, 2007 @ 11:21 am

  2. प्रियांकर जी ,छोटी सी कविता में बहुत बड़ी बात कह दी आपने ….अच्छे बिचार है …अच्छा लगा आपको पढना ….बधाई .हमारे ब्लोग पे भी आपका स्वागत है .

    Comment by राज यादव — September 22, 2007 @ 5:59 pm

  3. आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
    ऎसेही लिखेते रहिये.
    क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
    जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

    Comment by deepanjali — September 24, 2007 @ 9:36 am

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