अनहद नाद

September 5, 2007

रघुवीर सहाय की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 5:42 am

  

दर्द

 

देखो शाम घर जाते बाप के कंधे पर

बच्चे की ऊब देखो

उसको तुम्हारी अंग्रेज़ी कह नहीं सकती

और मेरी हिंदी भी कह नहीं पाएगी

अगले साल ।

 

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September 4, 2007

अपमान

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 7:44 am

Bhavani bhai 

भवानी भाई की एक कविता

 

अपमान

 

अपमान का

इतना असर

मत होने दो अपने ऊपर

 

सदा ही

और सबके आगे

कौन सम्मानित रहा है भू पर

 

मन से ज्यादा

तुम्हें कोई और नहीं जानता

उसी से पूछकर जानते रहो

 

उचित-अनुचित

क्या-कुछ

हो जाता है तुमसे

 

हाथ का काम छोड़कर

बैठ मत जाओ

ऐसे गुम-सुम से !

 

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September 3, 2007

भारतभूषण अग्रवाल की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 5:45 am

 

भारतत्व

 

गांवों में समाजवाद, शहरों में पूंजीवाद, दफ़्तर में सामन्तवाद

घर में अधिनायकत्व है

कभी-कभी लगता है

यही भारतत्व है ।

 

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