Posted by: PRIYANKAR | October 29, 2007

कुंवर नारायण की एक कविता

कुंवर नारायण 

 दुनिया की चिन्ता 

 

छोटी सी दुनिया

                             बड़े-बड़े इलाके

हर इलाके के

                          बड़े-बड़े लड़ाके

हर लड़ाके की

                          बड़ी-बड़ी बन्दूकें

   हर बन्दूक के बड़े-बड़े धड़ाके

 

सबको दुनिया की चिन्ता

 सबसे दुनिया को चिन्ता ।

 

******

 

( काव्य संकलन इन दिनों  से साभार )

 


Responses

  1. बढिया रचना प्रेषित की है।बधाई।

  2. सबको दुनिया की चिन्ता-सबसे दुनिया को चिन्ता ।

    -बेहतरीन प्रस्तुति.

  3. बड़े धड़ाके वाली चिंता को रेखांकित करती अच्छी कविता….
    बेहतर प्रस्तुति

  4. सबको दुनियाँ की चिंता शायद नहीं है; सबसे दुनियाँ को चिंता जरूर है।


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