अनहद नाद

October 29, 2007

कुंवर नारायण की एक कविता

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 9:40 am

  

 दुनिया की चिन्ता 

 

छोटी सी दुनिया

                             बड़े-बड़े इलाके

हर इलाके के

                          बड़े-बड़े लड़ाके

हर लड़ाके की

                          बड़ी-बड़ी बन्दूकें

   हर बन्दूक के बड़े-बड़े धड़ाके

 

सबको दुनिया की चिन्ता

 सबसे दुनिया को चिन्ता ।

 

******

 

( काव्य संकलन इन दिनों  से साभार )

 

4 Comments »

  1. बढिया रचना प्रेषित की है।बधाई।

    Comment by paramjitbali — October 29, 2007 @ 12:51 pm

  2. सबको दुनिया की चिन्ता-सबसे दुनिया को चिन्ता ।

    -बेहतरीन प्रस्तुति.

    Comment by समीर लाल — October 29, 2007 @ 2:58 pm

  3. बड़े धड़ाके वाली चिंता को रेखांकित करती अच्छी कविता….
    बेहतर प्रस्तुति

    Comment by बोधिसत्व — October 29, 2007 @ 4:28 pm

  4. सबको दुनियाँ की चिंता शायद नहीं है; सबसे दुनियाँ को चिंता जरूर है।

    Comment by Gyandutt Pandey — October 30, 2007 @ 3:17 am

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