शुभकामनाएं/सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
नए साल की शुभकामनाएं !
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नए साल की शुभकामनाएं !
खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएं !
खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएं !
जांते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएं !
इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएं !
वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएं !
इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएं !
कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएं !
उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएं !
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शुक्रिया इस बढ़िया कविता को पढ़वाने के लिए!
नया साल आपको पहले से बेहतर बहुत कुछ दे जाए!
नव वर्ष की शुभकामनाएं!
कहां व्यस्त है इन दिनों दिखते ही नही आपके पोस्ट न कमेंट कहीं
Comment by Sanjeet Tripathi — January 3, 2008 @ 12:07 pm
बहुत ही सुंदर और सहज कविता है ….आभार इसे हम तक पहुँचाने के लिये …
Comment by reetesh gupta — January 3, 2008 @ 1:57 pm
चलिये, नये साल ने आपको ब्लॉगीय तन्द्रा से बाहर निकाला। और चुप्पी तोड़ी भी तो सर्वेश्वर जी की अच्छी कविता से।
नव वर्ष मंगलमय हो।
Comment by ज्ञानदत्त पाण्डेय — January 3, 2008 @ 2:21 pm
धन्यवाद । साल मुबारक़ ।
Comment by अफ़लातून — January 3, 2008 @ 2:39 pm
बहुत सुन्दर कविता…
आपको भी नव वर्ष की शुभकामनायें।
Comment by Sagar Nahar — January 3, 2008 @ 2:50 pm
सुन्दर कविता के लिए आभार। माह में एक बार ही पोस्ट। अखरता है।
Comment by दिनेशराय द्गिवेदी — January 4, 2008 @ 3:44 am
त्रिलोचन : किवदन्ती पुरूष
Comment by Sanjeeva Tiwari — January 12, 2008 @ 12:47 pm
नववर्ष में सुन्दर अभिव्यक्ति आपके साथ रहे.शुभकामनाओं सहित,
Comment by रजनी भार्गव — February 5, 2008 @ 1:13 pm