अनहद नाद

March 13, 2008

दुनिया की सबसे शानदार कविता

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 महेन्द्र सिंह पूनिया की एक कविता

 

दुनिया की सबसे शानदार कविता

 

दुनिया की सबसे शानदार कविता

कलम से नहीं

हल की नोक से लिखी जाती है

दुनिया की सबसे शानदार कविता

मंडी हाउस में बैठनेवाला दलाल नहीं

लालटेन की रौशनी में

कसीदा काढ़नेवाली

सलमा लिखती है

दुनिया की सबसे शानदार कविता

स्याही से नहीं

सड़क पर पत्थर कूटती

रामरती के

पसीने से लिखी जाती है

दुनिया की सबसे शानदार कविता

चरवाहों के पैरों से

थार के सीने पर लिखी जाती है

दुनिया की सबसे शानदार कविता

अजायबघर से सजे बैठकखानों में नहीं

गिरिडीह की

कोयला-खदानों में लिखी जाती है

 

दुनिया की सबसे शानदार कविता का पाठ

वातानुकूलित सभागारों में नहीं

उन्मुक्त चांदनी रात में

खेत की मेंड़ पर होता है।

 

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