अनहद नाद

May 2, 2008

स्वागत में

Filed under: Uncategorized — PRIYANKAR @ 8:56 am

ठ??ानीप्रसाद मिश्र

       (  1913-1985 )

वानीप्रसाद मिश्र की एक कविता

 

स्वागत में

 

 मन में

जगह है जितनी

 

उस सब में मैंने

फूल की

पंखुरियां

बिछा दी हैं यों

 

कि जो कुछ

मन में आए

 

मन उसे

फूल की पंखुरियों पर

सुलाए !

 

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