Posted by: PRIYANKAR | May 2, 2008

स्वागत में

    

वानीप्रसाद मिश्र की एक कविता

 

स्वागत में

 

 मन में

जगह है जितनी

 

उस सब में मैंने

फूल की

पंखुरियां

बिछा दी हैं यों

 

कि जो कुछ

मन में आए

 

मन उसे

फूल की पंखुरियों पर

सुलाए !

 

****


Responses

  1. कि जो कुछ
    मन में आए
    मन उसे
    फूल की पंखुरियों पर
    सुलाए !

    मिश्र जी की इतनी सुन्दर कविता से परिचित कराने का आभार..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  2. आपका और केडिया जी का आभार ।

  3. बहुत सुन्दर प्रियंकर जी।
    जब आपसे मिलूंगा तो भवानी प्रसाद मिश्र जी की ढ़ेरों कवितायें झटकूंगा।

  4. हम तो पहले भी कई बार कह चुके हैं कि भवानी दादा हमारे प्रिय कवि हैं ।
    उनकी हर कविता हमें प्रिय है ।

  5. बहुत प्यारी बात!

  6. भवानी प्रसाद मिश्र जी की कविता पढ़कर आनन्द आ गया. आभार प्रस्तुत करने का.

  7. बहुत गहरी बात… बहुत सरल शब्दों में…..एक अच्छी कविता प्रस्तुत करने लिए हार्दिक आभार….


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