भवानीप्रसाद मिश्र की एक कविता
स्वागत में
मन में
जगह है जितनी
उस सब में मैंने
फूल की
पंखुरियां
बिछा दी हैं यों
कि जो कुछ
मन में आए
मन उसे
फूल की पंखुरियों पर
सुलाए !
****
भवानीप्रसाद मिश्र की एक कविता
स्वागत में
मन में
जगह है जितनी
उस सब में मैंने
फूल की
पंखुरियां
बिछा दी हैं यों
कि जो कुछ
मन में आए
मन उसे
फूल की पंखुरियों पर
सुलाए !
****
Posted in कविताएं/Poems | Tags: भवानी भाई
कि जो कुछ
मन में आए
मन उसे
फूल की पंखुरियों पर
सुलाए !
मिश्र जी की इतनी सुन्दर कविता से परिचित कराने का आभार..
***राजीव रंजन प्रसाद
By: राजीव रंजन प्रसाद on May 2, 2008
at 9:17 am
आपका और केडिया जी का आभार ।
By: अफ़लातून on May 2, 2008
at 9:44 am
बहुत सुन्दर प्रियंकर जी।
जब आपसे मिलूंगा तो भवानी प्रसाद मिश्र जी की ढ़ेरों कवितायें झटकूंगा।
By: Gyan Dutt Pandey on May 2, 2008
at 11:00 am
हम तो पहले भी कई बार कह चुके हैं कि भवानी दादा हमारे प्रिय कवि हैं ।
उनकी हर कविता हमें प्रिय है ।
By: यूनुस on May 2, 2008
at 1:20 pm
बहुत प्यारी बात!
By: अभय तिवारी on May 2, 2008
at 2:47 pm
भवानी प्रसाद मिश्र जी की कविता पढ़कर आनन्द आ गया. आभार प्रस्तुत करने का.
By: समीर लाल on May 2, 2008
at 4:05 pm
बहुत गहरी बात… बहुत सरल शब्दों में…..एक अच्छी कविता प्रस्तुत करने लिए हार्दिक आभार….
By: ramadwivedi on May 3, 2008
at 9:20 am