Posted by: PRIYANKAR | July 27, 2008

कुछ सूचनाएं

धूमिल की एक कविता

 

कुछ सूचनाएं

 

सबसे अधिक हत्याएँ

समन्वयवादियों ने की

 

दार्शनिकों ने

सबसे अधिक ज़ेवर खरीदा

 

भीड़ ने कल बहुत पीटा

उस आदमी को

जिस का मुख ईसा से मिलता था

 

 वह कोई और महीना था

जब प्रत्येक टहनी पर फूल खिलता था

किंतु इस बार तो

मौसम बिना बरसे ही चला गया

न कहीं घटा घिरी

न बूँद गिरी

फिर भी लोगों में टी.बी. के कीटाणु

कई प्रतिशत बढ़ गए

 

 कई बौखलाए हुए मेंढक

कुएँ की काई लगी दीवाल पर

चढ़ गए

और सूरज को धिक्कारने लगे

— व्यर्थ ही प्रकाश की बड़ाई में बकता है

सूरज कितना मजबूर है

कि हर चीज़ पर एक सा चमकता है

 

 हवा बुदबुदाती है

बात कई पर्तों से आती है —

एक बहुत बारीक पीला कीड़ा

आकाश छू रहा था

और युवक मीठे जुलाब की गोलियाँ खा कर

शौचालयों के सामने

पँक्तिबद्ध खड़े हैं

 

 आँखों में ज्योति के बच्चे मर गए हैं

लोग खोई हुई आवाज़ों में

एक दूसरे की सेहत पूछते हैं

और बेहद डर गए हैं

 
सब के सब

रोशनी की आँच से

कुछ ऐसे बचते हैं

कि सूरज को पानी से

रचते हैं

 

 बुद्ध की आँख से खून चू रहा था

नगर के मुख्य चौरस्ते पर

शोकप्रस्ताव पारित हुए

हिजड़ो ने भाषण दिए

लिंग-बोध पर

वेश्याओं ने कविताएँ पढ़ीं

आत्म-शोध पर

प्रेम में असफल छात्राएँ

अध्यापिकाएँ बन गई हैं

और रिटायर्ड बूढ़े

सर्वोदयी —

आदमी की सबसे अच्छी नस्ल

युद्धों में नष्ट हो गई

देश का सबसे अच्छा स्वास्थ्य

विद्यालयों में

संक्रामक रोगों से ग्रस्त है

 
(मैंने राष्ट्र के कर्णधारों को

सड़को पर

किश्तियों की खोज में

भटकते हुए देखा है)

 
संघर्ष की मुद्रा में घायल पुरुषार्थ

भीतर ही भीतर

एक निःशब्द विस्फोट से त्रस्त है

 

 पिकनिक से लौटी हुई लड़कियाँ

प्रेम-गीतों से गरारे करती हैं

सबसे अच्छे मस्तिष्क

आरामकुर्सी पर

चित्त पड़े हैं ।

 

****


Responses

  1. संघर्ष की मुद्रा में घायल पुरुषार्थ
    भीतर ही भीतर
    एक निःशब्द विस्फोट से त्रस्त है.
    bahut sundar samayik abhivakti . abhaar.

  2. आप जो लाते हैं, अच्‍छा लाते हैं। धूमिल की यह कविता पढ़ाने के लिए आभार।

  3. सण्डे को भी आपकी दुकान खुली और इतना बढ़िया परोसा! बहुत धन्यवाद।
    इसे पढ़ कर तो एक नहीं, कई आयामों में विचार कौंध गये। सुदामा पांडे की यह तासीर है।

  4. समय पर पहुंची सूचनाएं।


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