Posted by: PRIYANKAR | August 1, 2008

रास्ता काटना

एकांत श्रीवास्तव की एक कविता

 

रास्ता काटना

 

भाई जब काम पर निकलते हैं
तब उनका रास्ता काटती हैं बहनें
बेटियाँ रास्ता काटती हैं
काम पर जाते पिताओं का
शुभ होता है स्त्रियों का यों रास्ता काटना

 
सूर्य जब पूरब से निकलता होगा
तो नीहारिकाएँ काटती होंगी उसका रास्ता
ऋतुएँ बार-बार काटती हैं
इस धरती का रास्ता
कि वह सदाबहार रहे
पानी गिरता है मूसलाधार
अगर घटाएँ काट लें सूखे प्रदेश का रास्ता
जिनका कोई नहीं है
इस दुनिया में
हवाएँ उनका रास्ता काटती हैं

 
शुभ हों उन सबकी यात्राएं भी
जिनका रास्ता किसी ने नहीं काटा ।

 

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Responses

  1. जब एकांत बंबई आए थे और मैंने उनका इंटरव्‍यू किया था तक उन्‍होंने ये कविता हमारे लिए पढ़ी थी ।
    हम धन्‍य धन्‍य हो गये थे ।
    बहुत अच्‍छी और जरूरी कविता

  2. सुंदर कविता।

  3. शुभ हों उन सबकी यात्राएं भी
    जिनका रास्ता किसी ने नहीं काटा ।
    —————————–
    शुभ हों वे यात्रायें, जिनमें कांटों ने रास्ता काटा!
    और हम तो कांटों को बिछा-बिछा कर चल रहे हैं यात्रा पर। इसको क्या कामना करें?

  4. बढ़िया कविता छांट के लगाई आपने प्रियंकर जी. शुक्रिया पहले कवि का उस के बाद आप का.

  5. मार्मिक। कविता से दूर जाते पाठकों को इसी तरह की कविता पढ़वाकर पास बुलाया जा सकता है।


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