Posted by: PRIYANKAR | August 7, 2008

एक औरत का पहला राजकीय प्रवास

अनामिका की एक और कविता

 

एक औरत का पहला राजकीय प्रवास

 

वह होटल के कमरे में दाख़िल हुई
अपने अकेलेपन से उसने
बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया

 
कमरे में अंधेरा था
घुप्प अंधेरा था कुएँ का
उसके भीतर भी !

 

सारी दीवारें टटोली अंधेरे में
लेकिन ‘स्विच’ कहीं नहीं था
पूरा खुला था दरवाज़ा
बरामदे की रोशनी से ही काम चल रहा था
सामने से गुजरा जो ‘बेयरा’ तो
आर्त्तभाव से उसे देखा
उसने उलझन समझी और
बाहर खड़े-ही-खड़े
दरवाजा बंद कर दिया

 
जैसे ही दरवाजा बंद हुआ
बल्बों में रोशनी के खिल गए सहस्रदल कमल !
“भला बंद होने से रोशनी का क्या है रिश्ता ?” उसने सोचा

 
डनलप पर लेटी
चटाई चुभी घर की, अंदर कहीं–-  रीढ़ के भीतर !
तो क्या एक राजकुमारी ही होती है हर औरत ?
सात गलीचों के भीतर भी
उसको चुभ जाता है
कोई मटरदाना आदिम स्मृतियों का ?

 

पढ़ने को बहुत-कुछ धरा था
पर उसने बांची टेलीफोन तालिका
और जानना चाहा
अंतरराष्ट्रीय दूरभाष का ठीक-ठीक ख़र्चा

 
फिर, अपने सब डॉलर ख़र्च करके
उसने किए तीन अलग-अलग कॉल

 
सबसे पहले अपने बच्चे से कहा–-
“हैलो-हैलो, बेटे–-
पैकिंग के वक्त… सूटकेस में ही तुम ऊंघ गए थे कैसे…
सबसे ज़्यादा याद आ रही है तुम्हारी
तुम हो मेरे सबसे प्यारे !”

 
अंतिम दो पंक्तियाँ अलग-अलग उसने कहीं
आफिस में खिन्न बैठे अंट-शंट सोचते अपने प्रिय से
फिर, चौके में चिन्तित, बर्तन खटकाती अपनी माँ से

 
… अब उसकी हुई गिरफ़्तारी
पेशी हुई ख़ुदा के सामने
कि इसी एक ज़ुबाँ से उसने
तीन-तीन लोगों से कैसे यह कहा
–- “सबसे ज्यादा तुम हो प्यारे !”
यह तो सरासर है धोखा
सबसे ज्यादा माने सबसे ज्यादा !

 
लेकिन, ख़ुदा ने कलम रख दी
और कहा–-
“औरत है, उसने यह ग़लत नहीं कहा !”

 

****


Responses

  1. बेहद खूबसूरत…
    बहुत ही सुंदर.
    प्यारा गीत. अच्छा लगा पढ़ कर.

  2. bahut achchi….
    bahut sundar….

  3. लेकिन, ख़ुदा ने कलम रख दी
    और कहा–-
    “औरत है, उसने यह ग़लत नहीं कहा

    बहुत सुन्दर लिखा है। सरल शब्दों में जीवन का सम्पूर्ण निचोड़ रख दिया। बधाई

  4. waah! kitna sach!!

  5. क्या बात है. How true. Almost so blatant and yet not quite … Beautiful.

  6. प्रियंकरजी, अनहद-नाद पर एक टिप्पणी लिखी है। फुरसत से एक नजर मारिएगा। लिंक दे रहा हूं।
    http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0808/07/1080807081_1.htm

  7. vahut hi sunder our komal rachana………vilkul ek ourat ke man ki hi tarah.


Leave a response

Your response:

Categories