Posted by: PRIYANKAR | अप्रैल 11, 2007

औरत

कैलाश सेंगर की तीन कविताएं

 

 

औरत

 

१.

बच्चे को सुलाती औरत

उसे सुनाती कहानी —

‘एक शहजादी को शहजादे से चुराकर

एक दैत्य ने पिंजड़े में बंद कर दिया’

कहानी सुन कर

बच्चा सो जाता है

कहानी की शहजादी

उसकी मां ही है

नहीं समझ पाता है।

 

२.

 

दोपहर को जब पति ऑफ़िस में

और बच्चे स्कूल में होते हैं

औरत टीवी पर आ रही

पुरानी ब्लैक एंड वाइट फ़िल्में देखती है

नई फ़िल्मों से

पुरानी फ़िल्में कितनी अच्छी होतीं हैं

कितना रोना आता है न उन्हें देखकर!

और तब खूब रोती है औरत

औरत सुकून से रोते हुए याद करती है

उन फ़िल्मों को

ताज़ा-ताज़ा,चुपके-चुपके देखने के वे प्रसंग

और खूब रो लेने के बाद,आंखें पोंछते हुए

हर रोज़ तय करती है वह

कि शाम पति और बच्चों के साथ

नई रंगीन फ़िल्मों के प्रोमोज़ देखेगी वह।

 

३.

 

औरत को

पुरानी आलमारी साफ़ करते हुए मिल जाती हैं

पुरानी तारीखों वाली     छुपाकर रखीं

कुछ गुलाबी चिट्ठियां     कुछ मुरझाए फूल

और चंद सूखी कसमें

पिछले माह ब्याह दी गई बेटी की

और उन्हें उसी तरह फिर से छुपाकर

लिखने लगती है बेटी को पत्र

पत्र में वह समझा देती है बेटी को

अच्छी तरह     संपूर्ण विधि

करवा चौथ की।

 

***********

 

( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )


Responses

  1. कविताएँ वेदना देने वाली हैं।

  2. शायद मैं कहना चाहता हूँ कि कविताएँ पढ़ कर मुझे वेदना हुई है।

  3. बहुत दर्द है पंक्तियों में.

  4. मन को छू लेने वाली कविताएं ।

  5. बहुत सुंदर कविताएं हैं। दिल को छू गईं।

  6. ओह, यह औरत तो शायद हमारे आस-पास रहती है.
    कविता की विशेष समझ नहीं है मुझे, पर यह समझने को तो सामान्य सम्वेदना चाहिये.

  7. आँखें नम हो गयीं

  8. दिल को छू लेने वाली कवितायें!

  9. Aur kab tak aurat ko chchupa chchupa kar rulane ka irada hai? Are uske ansoo bhi dekhaiye aur uska dard bhi samjhiye aur purush ko atma ke bhitar jhakne bhi sikhaiye!


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