Posted by: PRIYANKAR | अप्रैल 18, 2007

जब तक पेड़ है ……..

रविदत्त पालीवाल की एक कविता

 

 

 

नसीहत

 

जब तक पेड़ है

छांव तो रहेगी

पलेगी,   कहेगी —

धूप से

जितना तमतमाओगी

मुझमें निखार उतना

पाओगी

 

खिलो, पर तमतमाओ मत

डाकिया लाएगा तब

प्यार भरा खत ।

 

***********


Responses

  1. bahut hi achhee kavitaa . padh kar sukhad anubhooti huee .

  2. सुन्दर रचना ।

  3. बहुत अच्छा

  4. बढ़िया कविता

  5. वो कहते हैं न कि जितना तपाओगे उतना खरा होगा – सोना हो या व्यक्तित्व.
    पर अब अधेड़ होने पर धूप चुभती है. इसपर भी कोई कविता है प्रियंकर जी?

  6. आपने अच्छा लिखा है । ।
    घुघूती बासूती


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: