Posted by: PRIYANKAR | जुलाई 6, 2007

पूछती है मेरी बेटी

दिनेश कुशवाह की एक कविता

 

पूछती है मेरी बेटी

 

जनक बहुत कुछ जानते थे सीते !

जैसे कि हल की मुठिया थामे बिना राजा

नहीं समझ सकता दुख प्रजा का

 

कि क्या होती है पोषिता कन्या

पोषिता कुमारी ?

कितना कठिन है उसका जीवन-निर्वाह

 

इसलिए पिता विदेह ने

तुम्हें स्वयंवरा बनाया

कि स्वयं वर

बल-बुद्धि-संयम शील युक्त वर

पर रख दी शंभु-धनु-भंजन की शर्त

 

अपनी अमूल्य धरोहर दांव पर लगाकर भी

पिता निश्चिंत होना चाहता है

कहती है मेरी पत्नी

एक लड़की का पिता होकर ही

जाना जा सकता है

बहुत कुछ कर सकने की सामर्थ्य

और कुछ न कर पाने की मजबूरी को

 

पूछती है मेरी बेटी

पापा! समय ने तुममें और जनक में

कोई फ़र्क किया है क्या ?

और सोचता हूं मैं

एक वन से दूसरे वन जाना

वन-वन रोना ही नियति है क्यों

आज भी हमारी बेटियों की ।

 

**********

 

( समकालीन सृजन के ‘कविता इस समय’ अंक से साभार )


Responses

  1. daadaक्या बात है,आप चौपट स्वामी ही अच्छे लगते हो.तब ऐसे स्वाल नही पूछते,जिनका जवाब देने मे दिल दिमांग दोनो जवाब ना देने के कारण भागने का रास्ता ढूढ्ने लगते है…?

  2. हम बहुत तरकी कर रहें हें
    पहेले बेटियों को मरते थे
    बहुओ को जलाते थे
    अब तो हम
    कन्या भ्रुण हत्या करते है
    दूर नहीं है वो समय
    जब हम फक्र से कहेगे
    पुत्र पैदा करने के लिये
    हम किराये पर लेते हें
    विदेशी कोख

  3. Com on grow up Dinesh ji ,
    this is not the only side of coin. there may be some incidatents like this , now time has changes alot. you will agree with this.
    If the girl has brain she can be any where like PM/JUDGES/IAS/IPS/OUTER SPACE(KAVITA CHAWLA,SUNITA WILLIAMS) I will show you ladies there.
    Also i can show you boys still a burden on there parents sitting at home and doing nothing
    If you are selfish you do not want to support your BETI them keep crying socity bad .. socity bad … socity not letting girls rise..
    My intention is not to disregard your views they are true to 50% but its only one sided picture the other 50% I just mentioned above.

    • nameste sanjiv ji

      me app ki baat se sahmat hu par shyad app kavita ka marm nahi samaz paye,

  4. बेहद सुंदर कविता, आप लगातार अच्छी कविता पाठकों को चुन-चुनकर उपलब्ध कराते हैं. हम सबने आपको अपना परचेजिंग ऑफ़िसर बना दिया है, मैं आपकी चुनी हुई कविता हमेशा पढ़ता हूँ, आपको पारखी मानता हूँ. आपने निरंजन जी की कविता की आलोचना जिस खरे तरीक़े से की थी उसका भी कायल हूँ. साधुवाद

    हाँ, एक भूल है, पता नहीं, आपसे टाइप करने में हुई या कवि चूक गए, सामर्थ्य पुल्लिंग है, स्त्रीलिंग नहीं. का सामर्थ्य, की सामर्थ्य नहीं.

    आभार

  5. डॉ. दिनेश तक शुभकामना पहुँचायें ।

  6. Mr.Dinesh ji aap ki kavita really bahut khubsurat hai

  7. bahut khub maine aap ko pahali baar padha .padakar aisa lagaa ki mere pitaa ki pidaa mere se kuchh kah rahi hai……..waise aapki rachanaa par comment karane layak to hu nahi………….par rok bhi nahi payi ………………gustakhee ke liye mafi chahati hu………

  8. सुंदर रचना,
    धन्यवाद !


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