Posted by: PRIYANKAR | सितम्बर 4, 2007

अपमान

Bhavani bhai 

भवानी भाई की एक कविता

 

अपमान

 

अपमान का

इतना असर

मत होने दो अपने ऊपर

 

सदा ही

और सबके आगे

कौन सम्मानित रहा है भू पर

 

मन से ज्यादा

तुम्हें कोई और नहीं जानता

उसी से पूछकर जानते रहो

 

उचित-अनुचित

क्या-कुछ

हो जाता है तुमसे

 

हाथ का काम छोड़कर

बैठ मत जाओ

ऐसे गुम-सुम से !

 

**********

 


Responses

  1. बहुत अच्छा लगा यह कविता पढ़कर!

  2. बढ़िया कविता…प्रेरणा देतें है ऎसे कवि….धन्यवाद

  3. अच्छी रही रचना पढ़्कर अनुभूति. आभार.

  4. क्‍या बात है । भवानी दादा की कविताओं की बारिश हो रही है । आनंद परम आनंद ।

  5. हाथ के काम का महत्व समझाया , अपनी सरल,सहज ,अनूठी शैली में ।आभार ।

  6. सरल शब्द और सच !
    ..इसे कहते हैं कविता !

    — लावान्या


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