Posted by: PRIYANKAR | जुलाई 10, 2008

कविता पढ़ें और नए ब्लॉगर का स्वागत करें

( स. ही. वात्स्यायन अज्ञेय की यह कविता भाई आशुतोष ने अभी एक-दो दिन पहले अपने नए-नए शुरु किए गए ब्लॉग शब्दार्थ ( http://shabdarth.wordpress.com/2008/07/) पर पोस्ट की है .  भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्र रहे डॉ. आशुतोष आंदोलन की पृष्ठभूमि से आये हैं और कोलकाता के एक महिला महाविद्यालय में अरसे से पढाते हैं . बहुत पढे-लिखे, थोड़े आलसी, पर काफ़ी काम के आदमी हैं, बशर्ते उनसे काम लिया जा सके .  अपनी ट्रेडमार्क दाढी पर मुग्ध रहते हैं और जिस दिन उसे ट्रिम करवा लेते हैं शर्तिया उम्र से पांच साल कम दिखते हैं . हाल ही में जीवन की स्वर्णजयंती मना चुके इन प्राध्यापक-रीडर महोदय की फ़िटनेस रश्क करने लायक है . अब आए हैं तो हिंदी ब्लॉग जगत से भागने न पाएं इसके लिए आप सब इस नए ब्लॉगर का टिप्पणियों द्वारा इस्तकबाल करें . ऊपर एक बात कहने से छूट गई कि इन्होंने जुड़वां ब्लॉग को जन्म दिया  है . दूसरे का नाम है अपनी वाणी ( http://apanivani.blogspot.com/ ) . अन्त में यह ज़रूर कहना चाहूंगा कि इनके रहने से ( टिके रहने से ) ब्लॉग जगत की समृद्धि बढेगी .

 

अज्ञेय की एक कविता

 

जो पुल बनायेंगे

 

जो पुल बनायेंगे

 वे अनिवार्यतः

पीछे रह जायेंगे ।

सेनायें हो जायेंगी पार

मारे जायेंगे रावण

जयी होंगे राम

जो निर्माता रहे  इतिहास में

बन्दर कहलायेंगे ।

 

****


Responses

  1. Very exceelant. Thanks Kshetrapal Sharma

  2. क्या बात है !!!! बहुत सुंदर कहा है…बधाई

  3. आशुतोष जी का तहेदिल से स्वागत है..अज्ञेय की इस खूबसूरत कविता के लिए साधुवाद!

  4. सुंदर कविता। कम शब्‍दों में बहुत कुछ कह दे रही है।

  5. कविता लोवेस दिनेश


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