Posted by: PRIYANKAR | जुलाई 22, 2009

मैंने आहुति बन कर देखा

अज्ञेय की एक कविता

 

 मैंने आहुति बन कर देखा

 

मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,
मैं कब कहता हूं जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ?
कांटा कठोर है,  तीखा है,  उसमें उसकी मर्यादा है
मैं कब कहता हूं वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने ?

 
मैं कब कहता हूं मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले ?
मैं कब कहता हूं प्यार करूं तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले ?
मैं कब कहता हूं विजय करूं मेरा ऊंचा प्रासाद बने ?
या पात्र जगत की श्रद्धा की मेरी धुंधली-सी याद बने ?

 
पथ मेरा रहे प्रशस्त सदा क्यों विकल करे यह चाह मुझे ?
नेतृत्व न मेरा छिन जावे क्यों इसकी हो परवाह मुझे ?
मैं प्रस्तुत हूं चाहे मिट्टी जनपद की धूल बने —
फिर उस धूली का कण-कण भी मेरा गतिरोधक शूल बने !

 
अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है —
क्या वह केवल अवसाद-मलिन झरते आँसू की माला है ?
वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव-रस का कटु प्याला है
वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहन कारी हाला है ।

 
मैंने विदग्ध हो जान लिया, अन्तिम रहस्य पहचान लिया —
मैंने आहुति बन कर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है !
मैं कहता हूं,  मैं बढ़ता हूं,  मैं नभ की चोटी चढ़ता हूं
कुचला जाकर भी धूली-सा आंधी-सा और उमड़ता हूं ।

 
मेरा जीवन ललकार बने, असफलता ही असि-धार बने
इस निर्मम रण में पग-पग का रुकना ही मेरा वार बने !
भव सारा तुझको है स्वाहा सब कुछ तप कर अंगार बने —
तेरी पुकार-सा दुर्निवार मेरा यह नीरव प्यार बने ।

 

*****


Responses

  1. मैं कब कहता हूं प्यार करूं तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले ?

    मैंने विदग्ध हो जान लिया, अन्तिम रहस्य पहचान लिया —
    मैंने आहुति बन कर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है !

    aabhaar !

  2. अज्ञेय का क्रांतिकारी स्वर!

  3. अद्वितीय, अदभुत, सशक्त…

  4. अज्ञेयजी की कविता पढ़वाने का शुक्रिया।

  5. Ati sunder, dil ko choo lene waali!

  6. गजब!

  7. अज्ञेयजी की यह कविता मुझे बहुत पसन्द है…जीवन मे मैने पहली बार जो उपन्यास पढा वह “शेखर एक जीवनी” था..उसके बाद मुझे कुछ लिखने की प्रेरना मिली..उन्हे नमन..और आपका आभार..

  8. Inhe pehli bar padh ke maine apne jeewan ki margdarshak panktiyan bana liya tha aur woh mera sabse hitkar nirnay tha

  9. Had read the poetry in Xth standard.
    At that time its was just a text in syllabus but now its the motivation to move forward and make myself as I am.

  10. my all time fev poem… too much inspiring

  11. best poem in hindi to turn my life to new happiness and success -RP Maurya


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